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रिश्तों में चुदाई

मेरी चूत का मुँह लंड के एहसास से लाल हो कर खुल गया था जिससे उनके लंड को किसी तरह की परेशानी ना हो। मेरी चूत से काम-रस झाग बनके निकल कर मेरे चूतड़ों के
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“मम्मऽऽऽ… शहनाज़… मीऽऽऽऽ… ऊँमऽऽऽऽ… तुम बहुत सैक्सी हो। अब अफ़सोस हो रहा है कि तुम्हें इतने दिनों तक मैंने छुआ क्यों नहीं। ओफ…ओहहऽऽऽ तुम तो मुझ पागल कर
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मेरी पीठ मेरे ससुर ताहिर अज़ीज़ खान जी के सीने से लगी हुई थी। मैंने अपना सिर पीछे की ओर करके उनके कंधे पर रख दिया। साढ़े-चार इंच ऊँची हील के सैंडल पहने
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“आज मैं आपके बेटे की बीवी हूँ।” “लेकिन पहले तू मेरी सेक्रेटरी है। यहाँ पर तू मेरी सेक्रेटरी बन कर आई है… मेरे बेटे की बहू नहीं ! और सेक्रेटरी का काम
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कुछ देर बाद हम वहीं आराम करके अपने कपड़े पहन कर बाहर आ गये। बाहर अपनी टेबल पर आकर देखा कि टेबल खाली थी। मैंने बैठते हुए इधर-उधर नज़र दौड़ाई लेकिन साशा
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मैं कमरे से बाहर निकल कर बगल वाले कमरे में, जिसमें ससुर जी रह रहे थे, उसमें चली गई। ससुर जी कमरे में नहीं थे। मैंने इधर उधर नज़र दौड़ाई। बाथरूम से पान
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लाँग स्कर्ट्स के बाद माइक्रो स्कर्ट्स की बारी आई। मैंने एक पहना तो मुझे काफी शर्म आई। स्कर्ट्स की लम्बाई पैंटी के दो अंगुल नीचे तक थी। टॉप भी मेरी गो
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अभी दो महीने ही हुए थे कि मैंने अपने ससुर ताहिर अज़ीज़ खान जी को कुछ परेशान देखा। “क्या बात है अब्बू… आप कुछ परेशान हैं?” मैंने पूछा। “शहनाज़ ! तुम कल
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मैंने शर्म के मारे अपनी आँखें बंद कर लीं। मेरा चेहरा शर्म से लाल हो रहा था। लेकिन मैं इस हालत में अपने पेशाब को रोकने में नाकाम थी और नशे में मुझसे ख
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उन्होंने मुझे बेडरूम में लाकर बिस्तर पर लिटा दिया। फिर वो मेरी बगल में लेट गये और मेरे चेहरे को कुछ देर तक निहारते रहे। फिर मेरे होंठों पर अपनी उँगली
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अचानक उन्होंने अपनी मुठ्ठी में बंद एक खूबसूरत लॉकेट मेरे गले में पहना दिया। “ये?” मैं उसे देख कर चौंक गई। “यह तुम्हारे लिये है। हमारी मुहब्बत की एक
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“शहनाज़ ! बहुत टाईट है तुम्हारी…” कहते हुए फिरोज़ भाईजान के होंठ मेरे होंठों पर आ लगे। “आपको पसंद आई?” मैंने पूछा तो उन्होंने बस ‘हम्म’ कहा। “यह आपके
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दीप के स्वप्नदोष का उपचार-1 निधि बजाज मेरे प्रिय मित्रो, मैं हूँ निधि, जो पहली बार अपने जीवन का यथार्थ आप सबके साथ सामने प्रकट कर रही हूँ ! मैं 27 वर
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निधि बजाज मैं उसके लौड़े को पकड़ कर आगे पीछे हिला हिला कर उसकी मुठ मारने लगी और उसे बताती रही कि ऐसा करने से वह उतेजित हो जाएगा और उसके अंदर का वीर्य ब
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मेरे जेठ फ़िरोज़ मेरे इस तरह उन्हें बुलाने से बहुत खुश हुए और मेरी बगल में लेट गये। हम दोनों की ओर देख कर जावेद दूसरी तरफ़ सरक गया और हमें जगह दे दी। अ
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दोनों भाइयों ने लगता है दूध की बोतलों का मुआयना करके ही निकाह के लिये पसंद किया था। नसरीन भाभी के निप्पल काफी लंबे और मोटे हैं, जबकि मेरे निप्पल कुछ
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मैं सैक्स की भूखी किसी चुदक्कड़ वेश्या की तरह छटपटा रही थी उनके लंड के लिये। “एक मिनट ठहरो।” कहकर उन्होंने मेरा गाउन उठाया और मेरी चूत को अच्छी तरह स
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मैं काफी उत्तेजित हो गई थी। जावेद इतना फोर-प्ले कभी नहीं करता था। उसको तो बस टाँगें चौड़ी करके अंदर डाल कर धक्के लगाने में ही मज़ा आता था। उन्होंने मे
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मैं उनका हाथ थाम कर बिस्तर से उतरी। जैसे ही उनका सहारा छोड़ कर बाथरूम तक जाने के लिये दो कदम आगे बढ़ी तो अचानक सर बड़ी जोर से घूमा और मैं हाई-हील सैंडलो
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शुरू-शुरू में तो मुझे बहुत शर्म आती थी। लेकिन धीरे-धीरे मैं इस माहौल में ढल गई। कुछ तो मैं पहले से ही चंचल थी और पहले गैर मर्द, मेरे ननदोई ने मेरे शर
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मैं जावेद को उत्तेजित करने के लिये कभी-कभी दूसरे किसी मर्द को सिड्यूस करने लगती। उस शाम तो जावेद में कुछ ज्यादा ही जोश आ जाता। खैर हमारा निकाह जल्दी
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मैंने उसकी स्कर्ट एक झटके में उतार कर फेंक दी। एक जवान खूबसूरत लड़की मेरे बिस्तर पर सिर्फ पेंटी में थी। एकदम गोरा रंग, बिना बालों का नमकीन सा जिस्म। स
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वक़्त देखते हुए मैंने ज्यादा आगे ना बढ़ने का विचार किया और उसको पजामा और अपने कपड़े सही करने को कहा। वो उठी और अपना पजामा चढ़ाने लगी। मैंने उसको रोका और
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अन्तर्वासना के सभी पाठकों को संजय का नमस्कार ! दोस्तो, मेरी कहानियों को आपने इतना पसंद किया उसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ! आपके प्रोत्साहन से प्रे
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यह मेरी निजी दास्तान है, जो मैं आप लोगों के सामने रखने जा रही हूँ। मेरा नाम रिया है। मेरे दो भाई हैं, एक मुझसे 3 साल बड़ा है। उसका नाम ऋषभ हैं, और एक
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लेखक – रजत हाय ! मैं रजत छत्तीसगढ़ से आपकी सेवा में हाजिर हूँ। मेरी उम्र 28 साल, ऊँचाई 5.9, रंग गोरा है। मैं अपनी कहानी पर आता हूँ, मेरी कहानी का आधा
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शनिवार को मेरा इंटरव्यू था। नियत समय पर मैं गया। कुछ सवाल पूछ कर बॉस ने बाईस हजार पर मेरी नौकरी तय कर दी। सोमवार को ज्यॉन करना था। मैं खुश हो गया। दी
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दोस्तो, मेरी कहानियों पर बहुत से अनजान मित्रों के मेल आते रहते हैं। यह कहानी उन्हीं में से एक मित्र की है जो उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। अब आगे क
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मेरी सास हुई हमबिस्तर-1 मैंने सासू माँ की पेंटी धीरे से सरका कर हटा दी. वो प्यार से छटपटाने लगी. मैंने सासू माँ को उल्टा लिटाया बैठी हुई घोड़ी के स्टा
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मेरा नाम राम सिंघानिया है, मैं जयपुर का रहने वाला हूँ. जयपुर में मेरा शानदार बंगला है और केमिकल की फ़ैक्ट्रियाँ हैं, एक्सपोर्ट का बहुत बड़ा कारोबार है
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