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पड़ोसी

हैलो दोस्तो, मेरा नाम उदय है, मैं गुजरात का रहने वाला हूँ। मैं अन्तर्वासना का बड़ा फैन हूँ, प्रेम गुरु, फ़ुलवा, इमरान, उषा मस्तानी, ज़ूजाजी, सन्नी, जव
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मेरा नाम आर्यन है। मैं कानपुर में रहता हूँ। यह मेरी काम-कथा है जो 2007 में घटित हुई, जब मैं अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा था। मैं एक रूम किराये पर ले
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इमरान मैं बाथरूम में जाकर नहाने की तैयारी कर ही रहा था कि मुझे दरवाजे की घण्टी की आवाज सुनाई दी… ट्रीन्न्न्न्न… ट्रीन्न्न्न्न… मैं सोचने लगा कि अभी क
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उसने मुझे अपने से इस तरह चिपका लिया था कि उसका खड़ा लंड मेरे चूतड़ों की दरार में घुसने लगा। वो मेरे मम्मों दबाए जा रहा था और मैं भी अब गर्म होने लगी थी
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हैलो दोस्तो, नमस्कार मैं एक बार फिर आप के सामने अपने ओड़ीसा में बिताए 40 दिन के बारे में बताने के लिए अब तक 20 दिन हो चुके हैं और मैं मोनिका और उसकी
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कहानी का पहला भाग: जुदाई ने मार डाला-1 वो मेरी गोद में गिर गई और बोली- प्लीज छोड़ो मुझे नहीं तो कोई देख लेगा तो बवाल हो जाएगा। मैंने कहा- सुबह के साढ़े
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अन्तर्वासना के सभी पाठक और पाठिकाओं को मेरा नमस्कार, मैं पिछले चार साल से अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ जिसे पढ़कर मैं रोज मुट्ठ मारता हूँ। मेरा नाम
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सबको मेरा सादर नमस्कार। मेरा नाम अमित है, उम्र 27 साल, लम्बाई 5’11”, वजन 70 किलो के लगभग होगा। मैं एक विवाहित व्यक्ति हूँ, दिल्ली का रहने वाला हूँ। ब
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दोस्तो, मेरा नाम मुकुल जैन है, उम्र 26 साल और कद 5’5 रंग गोरा है। बात उन दिनों की है जब मैं भिलाई में किराए के मकान में रहता था मेरे सामने वाले घर मे
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मेरा नाम है शिवम 27 है। मैं साउथ दिल्ली से हूँ, मैं एक ज़िगोलो हूँ, दिल्ली में रहता हूँ। मेरे घर के पास में ही एक घर में छोटा सा क्लिनिक है, क्लिनिक
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प्रेषक : अमन वर्मा मैं समझ गया कि आंटी को शायद मुझ पर शक हो गया है। वैसे तो वो भी ये बात बहुत अच्छे से समझती थीं कि चुदाई की भूख ऐसी ही होती है। अगर
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लेखक : रोहित हाय फ़्रेन्ड्स, मेरा नाम रोहित है। मैं रायपुर का रहने वाला हूँ, पर फ़िलहाल मैं NIT ज़ालन्धर में पढ़ाई करता हूँ और यहीं रहता हूँ। अभी-अभी 19
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प्रेषक : अमन वर्मा थोड़ी देर में आंटी हाँफते हुए बोल पड़ीं- मैं गई..! और वो झड़ गईं, उनकी चूत की दीवारों से पानी झड़ने लगा। उनके रज से मेरा लण्ड पूरी
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दोस्तो, मेरी पिछली कहानी में मैंने बताया था कि कैसे मेरा ठिकाना लखनऊ में हुआ और फिर यहाँ जो ननद-भाभी की चूत के दर्शन सुलभ हुए तो वारे न्यारे हो गए और
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प्रेषक : अमन वर्मा नमस्ते दोस्तो, मैं अमन वर्मा आपका दोस्त ! आप लोग तो मुझे जानते ही होंगे। आप लोगों ने मेरी अब तक की कहानी पढ़ी और आप लोगों के बहुत
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चूत की खुजली एक शाम मैंने फिर मुठ्ठ मार कर उसकी चड्डी में पोंछ कर टांग दिया और अपने कमरे की खिड़की से उसकी प्रतिक्रिया देखने लगा। उसने जब कपड़े समेटे त
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नमस्कार दोस्तो ! एक बार फ़िर मैं अपने जीवन की सच्ची कहानी प्रस्तुत कर रहा हूँ। नये पाठकों के लिये मेरा परिचय फ़िर से- मेरा नाम मनोज हैं, 28 साल का हूँ,
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प्रेषक : नीरव शाह मेरा नाम नीरव है। मैं सुरेन्द्रनगर में रहता हूँ। मेरी उम्र 22 साल है। मैं कॉलेज में पढ़ाई करता हूँ। मेरी लंबाइ 5’8” है। मैं देखने मे
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“बस आंटी अब ज़रा इस अपनी इस मस्त गाण्ड को पीछे को उभार दो और जितना हो सके वॉशबेसिन पर झुक जाओ ऊऊऊ अन्न्न्नान्न्न..!” “उन्न्न्हह्ह्ह्ह..वीर पर झड़ना नही
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प्रेषक : वीर सिंह इस कहानी के पांचवें भाग में आपने पढ़ा : बबिता आँटी मेरी पूरी मलाई चाट के वो उठी, कुर्सी के हत्थों से आराम से पैर निकाले और मटक-मटक क
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प्रेषिका : आशा संजय यह देख कर पूरी तरह उत्तेजित हो चुका था, इससे पहले मैं कुछ कहती वो मेरे बदन पर चढ़ गया और मेरे मम्मे दबाने लगा। मैंने उसका सर पकड़
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प्रेषिका : आशा मेरा नाम आशा है और आज मैं आपको अपनी दास्तान सुनाने जा रही हूँ। मेरी पहली कहानी अन्तर्वासना के नियमानुकूल ना होनेर के कारण प्रकाशित नह
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प्रेषिका : आशा संजय अपनी टाँग फैला कर बिस्तर पर बैठ गया और मैंने अपनी सैंडल को उसके शॉर्ट्स के नज़दीक रख दिया और अपनी टाँगें थोड़ी सी फैला लीं। संजय ध
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प्रेषक : इमरान ओवैश “सुख का क्या है, कई लोग होते हैं जिनकी किस्मत में शादी टूटने के बाद सुख नहीं होता और कई लोग होते हैं, जिनकी किस्मत में शादी होते
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प्रेषक : आकाशदीप मेरा नाम आकाशदीप है और अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है। मैं हरियाणा में रहता हूँ। हमारे घर के पास एक बहुत ही सुन्दर लड़की रहती थ
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प्रेषक : इमरान ओवैश दोस्तो, मैं इमरान, मुंबई में रहता हूँ और एक मोबाइल कम्पनी में काम करता हूँ। ज़िन्दगी अब तक ऐसी गुजरी है कि उस पर कभी तो लानत भेज
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प्रेषक : होलकर उन्होंने सर पर कपड़ा कब लपेट लिया था, ध्यान ही नहीं रहा। ‘हाय मेरी सिल्क स्मिता !’ मैंने दिल में सोचा, मैंने धीरे से सर का कपड़ा खोला
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प्रेषक : होलकर नज़ारा भूले नहीं भूलता, चिकनी, चमकदार चमड़ी का स्पर्श और चिकना पेट आँखों में घूमता रहा, माँ का भोंसड़ा प्लेबाय मैगजीन का ! अन्दर आकर आंट
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शेक्सपीयर जो अपने आपको बड़ा चाचा चौधरी समझता था, उसने कहा था कि बेशक गुलाब को अगर गुलाब की जगह किसी और नाम से पुकारा जाता तो क्या ? वो ऐसी भीनी भीनी
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बबिता ने फिर से अपने दोनों हाथ अपने घुटनों पर रख लिए और बेसब्री से मेरे से अपनी गाण्ड चटवाने के लिए चूतड़ और पीछे को निकाल दिए। मैंने बहुत सारा थूक उस
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