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चुदाई की कहानी

वो भी कर ही लिया लगातार मेरी नाक बह रही है, सारा बदन टूट रहा है, अभी उठी हूँ… श्रेया ने कॉफी बना कर दी, उससे भी ज़्यादा कुछ फ़र्क नहीं लगा उसने पूछा-
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एक बार फिर मैं अपनी नई कहानी लेकर आपसे रूबरू हो रहा हूँ, यह कहानी असल में मेरा एक सपना है, जो मैंने अभी तीन–चार दिन पहले ही देखा था, उसी को आपके सामन
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जैन साहब उस दिन नाई की दुकान में अपनी बारी की इन्तजार में बैठे किसी फिल्मी पत्रिका में एक हास्य अभिनेता के सपनों के घर के बारे में पढ़कर चौंक गये ! च
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शाम को मैं फिर घर पहुँची। राकेश आये तो उन्होंने रात को सोते समय फिर मुझे दबोच लिया, अपना खड़ा लंड मेरे हाथों में थमा दिया। मैं जानती थी कि उन्हें चुस
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मैं रोनी सलूजा, अन्तर्वासना कहानियों के भण्डार में आप सभी पाठक पाठिकाओं का स्वागत करता हूँ, मुझे ख़ुशी है कि आप सभी मेरे द्वारा लिखी कहानी ‘निगोड़ी जवा
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मैं उनके बालों को सहलाते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के गर्व से फूली नहीं समा रही थी। फिर मैंने माफ़ी मांगते हुए उन्हें सारी सच्चाई बता दी तो वो
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मैंने सर को पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया, वो भी मेरे ऊपर आकर मेरे से लिपट गए, मेरे चेहरे को थामकर मेरे होंठों का रसपान करने लगे। उनका खड़ा लंड मुझे अपनी न
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सभी पाठकों को रोनी का प्यार भरा नमस्कार ! आज की कहानी विनीता की है जो उसने मुझे सुनाई थी, उसी को मैंने उसी के शब्दों की माला में पिरोकर आपके समक्ष प
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मेरा नाम अदित है, आज मैं अपनी पहली कहानी लिखने जा रहा हूँ, आशा करता हूँ कि आपको पसंद आएगी। हमारे परिवार बचपन से ही काफी करीब रहे हैं तो काफी आना जान
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प्रेषक : सचिन मेरी कहानी ‘ज्योमेट्री के साथ सेक्स’ को अन्तर्वासना पर जगह मिली, धन्यवाद। दोस्तो, आपके मेल मिले बहुत अच्छा लगा और स्फूर्ति मिली। मैं क
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तभी अचानक मुझे अपने अन्‍दर झरना सा चलता महसूस हुआ। अरूण का प्रेम दण्‍ड मेरे अन्‍दर प्रेमवर्षा करने लगा। अरूण के हाथ खुद ही ढीले हो गये… और उसी पल… आह
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उन्‍होंने अपने हाथ से मेरी ठोड़ी को पकड़ कर ऊपर किया और मेरी आँखों में झांकते हुए विनती सी करने लगे जैसे कह रहे हों, “प्‍लीज, मुझे अपनी प्राकृतिक अवस
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अरूण मेरे बिल्‍कुल नजदीक आ गये। मेरी सांस धौंकनी की तरह चलने लगी। अरूण ने चेहरा ऊपर करके अपने होंठ मेरे होठों पर रख दिया। आहहहह… कितना मीठा अहसास था।
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आखिर इंतजार की घड़ी समाप्‍त हुई और बुधवार भी आ ही गया। संजय के जाते ही मैंने अरूण के मोबाइल पर फोन किया। तो उन्‍होंने कहा, “बस एक घंटे में गाड़ी दिल्
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मुझे पुरूष देह की आवश्‍यकता महसूस होने लगी थी। काश: इस समय कोई पुरूष मेरे पास होता जो आकर मुझे निचोड़ देता… मेरा रोम रोम आनन्दित कर देता… मैं तो सच्‍
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दोनों लड़कियाँ आपस में एक दूसरे से अपनी योनि रगड़ रही थी। ऊफ़्फ़…!! मेरी उत्‍तेजना भी लगातार बढ़ने लगी। परन्‍तु मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्‍या
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इस सच्ची घटना के द्वारा मैं सबको यही बताना चाहती हूँ कि अगर पति-पत्नी थोड़ी समझदारी से काम लें तो एक नर्क भरी जिंदगी भी स्वर्ग बन जाती है। डॉक्टर अनुर
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“… यार, अठारह से अट्ठाईस साल की लड़कियाँ देखते ही कुछ होने लगता है…!” पतिदेव थे, फ़ोन पर शायद अपने किसी दोस्त से बातें कर रहे थे। जैसे ही उन्होंने
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प्रणाम पाठको, आपका अपना शिमत वापिस आ गया है अपनी नई कहानी को लेकर, वैसे आपने मेरी पहले वाली बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं ! आज मैं आप को अपनी एक नई और सच
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दोस्तो, मैं रोमा आप लोगों के साथ कहानी के माध्यम से मैंने अपना सेक्स अनुभव शेयर किया था..’इंटर कोलेज कम्पीटीशन’ ! उस मादक और उत्तेजक सेक्स अनुभव के
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उसने कहा- यह तो मैंने मन की बात कही है सिर्फ। मैं ऐसा कोई भी कदम शादी से पहले नहीं उठाऊँगी। और यह कहकर वो आकर मेरे सीने में सिमट गई। आज पहली बार मैंन
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19 साल की ही तो हुई थी मैं, जब मुझे कुछ रुपयों रूपये के बदले में पैंतालीस साल के सेठ नवीन कुमार को बेच दिया गया था। भले लोग कहते रहें कि मेरी शादी हु
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लेखिका : शीनू जैन एक बार मेरे मौसी की शादी में हम सभी गए थे। जिस होटल में शादी हुई थी, उसी होटल में सबके लिए कमरे बुक थे। मेरे चाचा, पापा, मॉम और मै
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मेरे सभी पाठकों को नमस्कार। अन्तर्वासना के माध्यम से में अपनी आपबीती घटनाए लाता रहा हूँ। बहुत से ईमेल आये इसलिए अगली घटना बताने से पहले एक बात बताना
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प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना मैं जैसे ही बेड पर बैठा पलक फिर से मेरी गोद में आकर बैठ गई और फिर उसने अपनी बाहें मेरे गले में डाल दी। मैंने एक बार फिर स
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प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना रेशम की तरह कोमल और मक्खन की तरह चिकना अहसास मेरी अँगुलियों पर महसूस हो रहा था। जैसे ही मेरी अंगुली का पोर उस रतिद्वार के
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प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना “जिज्जू ! एक बात सच बोलूँ ?” “क्या?” “हूँ तमारी साथै आपना प्रेम नि अलग दुनिया वसावा चाहू छु। ज्या आपने एक बीजा नि बाहों
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प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना “पलक अगर कहो तो आज तुम्हें पहले वो … वो …?” मेरा तो जैसे गला ही सूखने लगा था। “सर, ये वो.. वो.. क्या होता है ?” मेरी हाल
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नमस्कार मित्रो, आप सभी ने मेरी पहली कहानी पढ़ी होगी ‘पहला आनन्दमयी एहसास’ इसलिए अपना परिचय मुझे नहीं देना पड़ेगा.. आप सभी के लिए आज मैं कुछ रोचक जानका
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मैंने पिछली कहानी में आपको बताया था कि रानी को पाने के लिए कैसे मैंने पुष्पा से समझौता किया और उस समझौते के तहत किस तरह उसे चोदा। अब मैं बताता हूँ इ
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