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Antarvasna

मेरी डार्लिंग सिस्टर-16

6 मिनट

सुषमा के बदन से खेलने से मुझे बड़ा सुख मिल रहा था। मेरा लंड सरिया जैसा सख्त हो गया था और अब मुझे उसकी चूत खोदने का मेरा मतलब चोदने का मन होने लगा था।

मैंने सुषमा को उठाया और उसको बेड के किनारे पर लेटा दिया और उसकी टाँगे अपने कंधे पर रख लीं, फिर उसको एक आँख मार कर पूछा कि ‘पेलूँ’ !?!

वो चहक कर बोली- अब क्या लिख कर दे दूँ मेरे रज्जा !!

मैं उसकी इस अदा पर फिसल गया और अपना लंड उसके चूत के मुहाने पर रख कर एक जोरदार ठाप लगाई। मेरा आधे से ज्यादा लौड़ा उसके भोसड़े को चीरता हुआ अंदर पेवस्त हो गया था।

सुषमा की चीख निकल गई, “मा… मा र… दिया… या… या रे… बाबू… ऊ ऊ… जरा… धीरे करो आई… ई ई…”

मुझे उसकी चीखों ने और अधिक उत्तेजित कर दिया था। मैंने अपने लंड को बाहर खींच कर फिर से धक्का मारा, फिर धक्का और फिर धक्कों की चोट सुषमा की सुरंग पर पड़ने लगी।

रांड को मजा आने लगा था। कुतिया मुझसे बोली- आहा मेरे राजा धकाधक पेलते रहो, मेरी चूत की आग बहुत दिनों के बाद शांत हुई। आज मिला है कोई चोदू मर्द… आह… आह..आए… चोद मादरचोद… मुझे अपने बच्चे की अम्मा बना दे मेरे चोदू शेर!!

मैंने भी अपने धक्कों को जारी रखा अब मेरे मन में आया कि इसको अपने लौड़े की सवारी कराऊँ और उसके दुद्दू पीऊँ।

सो मैंने सुषमा की कमर में हाथ डाल कर उसको अपने कमर में लपेट कर उठाया।

उसने मुझसे पूछा- क्या करने का इरादा है?

मैं ने उसको बताया और घूम कर उसको अपने ऊपर लिया और मैं बेड पर लेट गया और उसको अपने ऊपर ले लिया।

सुषमा समझ गई कि अब उसको लुड़सवारी करनी है। उसने उचक कर अपनी चूत में मेरा हथियार भरा और मैंने उसके थन को पकड़ कर अपने मुँह की तरफ खींचा और उसके निप्पल से दूध की धार मेरे गले को तर करने लगी।

सुषमा की चूत बहुत पनिया गई थी। उसने मुझसे कहा- ऊपर आ जा, मैं जल्दी झड़ जाऊँगी।

मैंने हँसते हुए कहा- झड़ जाओ, मैं फिर तेरे ऊपर आकर तुमको चोद दूँगा।

और वही हुआ, अगले कुछ ही धक्कों में सुषमा का शरीर ऐंठने लगा।

सुषमा चीखने लगी, “ओ… ह ओ… ओ… मैं गई… ई… ई… ई…” और वो झड़ चुकी थी।

मैंने तनिक भी देर नहीं लगाई, तुरंत उसको पलट कर उसके ऊपर छा गया और खुद की स्पीड को बढ़ा कर सुषमा की रिसती चूत के रस से ही उसको दोबारा गरम कर के चुदाई को जारी रखना चाह रहा था।

पर उसकी हिम्मत शायद जवाब दे चुकी थी, और मैंने भी खुद को झड़ने का मन बना लिया चुदाई में एक बात का मुझे ज्ञान हुआ कि यदि खुद सोच लें कि अब झड़ना है, तो फिर लंड की कोई औकात नहीं है कि खड़ा रहे। उसकी रस धार छूट ही जाती है।

और वही हुआ, मैं भी उसकी चूत में ही अपना गर्म-गर्म लावा छोड़ने लगा। कुछ देर यूँ ही पड़े रहे हम दोनों फिर सुषमा ने उठ कर मेरा हथियार अपने पेटीकोट से पौंछा और खुद को भी साफ़ करके अपने कपड़े पहने और कमरे से निकल गई।

दोपहर में सुमीना ने सोनिया से कहा- चलो ब्यूटी पार्लर चलना है। वहाँ जाकर सुमीना ने सोनिया की फुल मसाज, आई ब्रो, फेसियल आदि के अलावा स्पेशल मेकअप भी करवाया जिसमें उसकी झाँटों को डिजाईन में कटवा कर और बुर को टाइट करने वाली क्रीम से ठीक करवा कर रात की चुदाई के लिए बिल्कुल तैयार कर दिया।

फिर वे उसको कुछ स्पेशल अंडर गारमेंट दिलाने भी ले गईं। एक खास किस्म की पैन्टी, जिसमें सिर्फ चूत को ढकने के लिए एक छोटा सा त्रिभुज नुमा गुलाब का फूल बना था और बाकी पूरे चूतड़ खुले दिखते थे।

और ब्रा भी फ्रंट ओपन वाली, जिसमें कप के नाम पर सिर्फ निप्पल को ढकने के लिए गोल गुलाब के फूल थे। कंधे पर कोई स्ट्रेप नहीं थे, सिर्फ पीठ से सहारे के लिए एक रेशमी डोरी लगी थी, जो आगे से ही बंधती थी और एक हल्के से झटके में खुल सकती थी।

उन्होंने एक बहुत ही झीनी सी बेबी-डौल फ्रॉक भी खरीदी, जिसमें सोनिया को अपना जलवा दिखाना था। एक बहुत ही छोटा सा जींस का निक्कर और स्लीबलेस सफ़ेद रंग का टॉप भी खरीदा।

सुमीना ने खुद के लिए भी लिए मेरी पसंद की हॉट सी ब्रा और पैंटी ली। अब सब कुछ तैयार हो गया था। वे लोग घर आ गईं।

सोनिया कुछ अधिक आत्मविश्वास से भरी हुई थी। सुमीना भी पूरी तरह उससे संतुष्ट थी।

उसने कहा- आज तेरा नाम सोनिया नहीं है। मैं तुझे जूही नाम से बुलाऊँगी। ठीक है?!

सोनिया ने ‘हाँ’ में सर हिलाया और वो अपने कमरे में चली गई। उसको बहुत तेज नींद आ रही थी और पता नहीं रात को कितनी देर तक जागना पड़ेगा, ये सोच कर उसका सो जाना ठीक भी था।

अब सुमीना ने मेरे लिए व्यवस्था की सोच कर उसकी एक सहेली विभा, जो उसके हेड ऑफिस के बॉस की बीवी थी, को फोन लगाया और उधर से फोन उठा तो इधर-उधर की बात करने के बाद सुमीना को यह मालूम पड़ गया कि उसका पति किसी ओफ़िशियल काम से 4 दिन के टूर पर गया है।

सुमीना ने उससे पूछा- आजकल आपकी सेक्स लाइफ कैसी चल रही है?

उसने बुरा सा मुँह बना कर कहा- उसका आज कल कुछ भी इंतजाम नहीं हो पा रहा है।

दरअसल विभा का पति नामर्द था और ये सुमीना को जब मालूम पड़ा था, जब एक बार उसने उसके बॉस के साथ रात बिताई थी। मादरचोद बिल्कुल हिजड़ा था। उसका लंड खड़ा ही नहीं होता था।

तब उसने उससे पूछा था कि वो उसकी बीवी को कैसे चोदता है? जबाब में उसका बॉस कुछ भी नहीं बोल पाया था।

सुमीना ने समझ लिया था कि इसकी बीवी जरुर घर से बाहर चुदती होगी। उसी समय से उसने ये ठान रखी थी कि इस मादरचोद की बीवी को किसी से चुदवा कर उसकी कुछ फोटो या वीडियो बन जाए तो, ये साला हमेशा मेरे जूतियों के नीचे ही रहेगा।

उसने आज इसी काम के लिए मुझे चुना था। सो उसने फोन पर विभा से कहा- यदि वो चाहे तो उसके लिए एक लंड का इंतजाम कर सकती है।

बस फिर क्या था बात बनती चली गई। सुमीना ने मुझे उसका आशिक जिगोलो बताया था जो बीस हजार में पूरी रात उसकी चूत की सेवा करता था।

विभा ने कहा- वो जिगोलो की सेवा उसके घर पर नहीं किसी होटल में लेना चाहती है और होटल के खर्चे की भी कोई चिंता नहीं है।

बस मेरे लंड का इंतजाम भी हो गया था। सुमीना ने मुझसे कहा- अपने घर में जो दो हैंडी-कैम हैं, उन दोनों की बैटरी बगैरह चैक कर लो। आज इस बॉस की लुगाई विभा की चुदाई लीला की फिल्म बनानी है।

और फिर देखती हूँ इस मादरचोद की सब हेकड़ी निकाल न दी तो मेरा नाम भी सुमीना छिनाल नहीं।

मैं उसकी इस बात पर हँस पड़ा और उसको अपने सीने से लगा कर उसकी एक जोरदार चुम्मी ले ली।

मैं आगे की कहानी लिखने की कोशिश करूंगी, तब तक के लिए नमस्कार !

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प्रकाशित किया गया था: रिश्तों में चुदाई