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Antarvasna

ग़ोवा में सुहागरात-2

7 मिनट

प्रेषक : रोहित मल्होत्रा

मैंने भी कह दिया- अच्छी लड़कियाँ महेन्द्र जैसे लोगों को ही मिलती हैं, हम जैसे लोगों को नहीं। क्या अच्छा नहीं होता कि जो आपको अच्छा लगे आप उसके साथ समय बिता सकें? खुश रह सकें? क्या खुशी पाने के लिये शादी जरुरी है? शायद इसीलिए मैं शादी ही नहीं करना चाहता। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

मेरी बात पर वो सोच कर बोली- तुम सही हो।

अब मुझे नींद आ रही थी तो मैंने कहा- चलो, अब वापस चलते हैं।

उसने कुछ ना कहा और हम कमरे की तरफ़ चल पड़े। उसके कमरे के पास आकर जैसे ही मैंने उसे ‘गुड-नाईट’ कहा वो पलट कर बोली, “क्या मैं आज की रात आप के साथ गुजार सकती हूँ? देखो मना मत करना तुमने ही कहा था कि जिसके साथ अच्छा लगे उसके साथ समय बिताना चाहिये ! मुझे सिर्फ़ एक रात दे दो प्लीज !”

उसके बोलने पर मैं ना जाने क्यों मना ना कर सका। हम दोनों अब अपने कमरे में थे। नेहा अब बदली-बदली सी लग रही थी।

रुम में आने के बाद उसने पूछा- क्या मेहमान को कुछ पिलाओगे नहीं !

मैंने तुरन्त फ़्रिज खोल कर पेप्सी की केन निकाल ही रहा था कि उसने आ कर बियर की एक बोतल निकाल ली और बोली, “मैं ये पियूँगी !

और मुँह से बोतल लगा कर पीने लगी। थोड़ा सा पीते ही उसने बोतल को झटके से नीचे रख दिया और अजीब सा मुँह बना कर बोली, “ये तो कड़वी है !”

मेरी हँसी निकल गई। मैं समझ गया कि नेहा ने शायद पहली बार बियर पी थी।

वो बोली- पूरे मुँह का टेस्ट बिगड़ गया।

मैंने तुरन्त फ़्रिज मे से कैडबरी निकाल कर उसे दिया और मैंने भी तोड़ कर खा ली तो वो बोली, “मैं मानती हूँ कि मुझे बियर नहीं पीना आता पर तुम्हें शायद कैडबरी खाना सिखाना पड़ेगा।”

नेहा एकदम से मेरे पास आकर अपने हाथों में कैडबरी लेकर मेरे मुँह में डाल दी और मुझे चुम्बन करने लगी। मेरे लिये उसका चुम्बन करने का तरीका ही नया था, वो पूरी जीभ मेरे मुँह में घुमा रही थी। कैडबरी कभी उसके मुँह में चली जाती, कभी मेरे मुँह में और उसका मीठा स्वाद… अय.. हय.. मैं कह नहीं सकता कि मुझे कितना मजा आ रहा था।

हम एक-दूसरे को चुम्बन करते रहे, जब तक कैडबरी खत्म नहीं हो गई।

बाद में नेहा ने हँसते हुए कहा, “देखा कैडबरी कैसे खाते है !”

अब तो मुझे भी लगने लगा कि कैडबरी आज तक मैं सचमुच गलत तरीके से खा रहा था।

एक कदम नेहा बढ़ा चुकी थी अब मेरी बारी थी मैंने भी उसे निराश नहीं किया… और मैंने कहा, “तुम्हें भी कैडबरी पूरी तरीके से खिलाना नहीं आता मै सिखाता हूँ तुम्हें।”

और मैंने उसे अपने बांहों में भर लिया और एक जोरदार चुम्बन लिया। मैं उसे बेड की तरफ़ ले गया और हमने एक-एक कर के अपने कपड़ों को अपने बदन से अलग किया और एक-दूसरे से लिपट गए।

अब मेरी बारी थी मैंने कैडबरी उसके सीने के दोनों निप्पलों पर लगाया और हाथों से मसलने लगा। वो एकदम बेचैन हो गई। तब मैंने मुँह से बारी-बारी से नेहा के चूचुकों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा।

अब तो नेहा भी अपने हाथों से कैडबरी ले कर अपने चूचुकों पर लगा कर मुझे चूसने में मदद करने लगी।

कम से कम 15 मिनट तक हम यही करते रहे। उसके बाद मैं नेहा के दोनों पैरों के बीच की घाटी को देखा, निहायत ही खूबसूरत, एकदम सफाचट, डबल-रोटी की तरह फूली हुई थी। मैंने उसको सहला कर धीरे से अपनी एक उंगली अन्दर डाल कर आगे-पीछे की, तो वो कमर उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी। अब मैंने थोड़ा नीचे आकर नेहा की दोनों टाँगों को पकड़ कर थोड़ा सा फ़ैलाया।

उफ़… ! क्या नजारा था… घाटी में प्यारी सी दरार…!

गुलाबी माल देख कर अब तो मेरा भी धैर्य जवाब देने लगा और उस प्यारी से दरार में अपना मुँह सटा दिया और अपनी जीभ का कमाल दिखाने लगा।

नेहा के मुँह से, “आह… आह्ह… आह्ह… ओह्ह… यू मेक मी मैड…” आवाज आने लगी।

मैं भी 10-12 मिनट तक लगा रहा और अचानक उसने मेरा सर कस कर अपने पैरों के बीच दबाया और एकदम से नेहा अकड़ गई। मैं समझ गया कि नेहा झड़ चुकी थी और थोड़ा शान्त हो गई। हम अलग हो गए।

मैंने अब साथ नहाने का प्रस्ताव रखा, वो मान गई। मेरे बाथरूम में बाथ-टब भी है और वो इतना बड़ा है कि दो लोगों के लिये एकदम फ़िट है। मैंने गरम पानी चालू कर दिया बाथ-टब में थोड़ा खुशबूदार लिक्विड सोप डाल दिया।

अब मैं और वो बाथ-टब में बैठ कर एक-दूसरे को साबुन के झाग से मसाज करने लगे। नेहा भी खूब एन्जॉय कर रही थी। अचानक ही उसने मेरे ‘कुतुब-मीनार’ को पकड़ लिया और बड़े प्यार से सहलाने लगी। थोड़ी देर हाथों से पानी में आगे-पीछे करने के बाद उसने अपने मुँह में मेरा लौड़ा ले लिया !

दोस्तो, मैं कभी किसी महिला को अपने मुँह में लेने को नहीं कहता, क्योंकि ये करना किसी-किसी को अच्छा नहीं लगता।

मगर नेहा पूरे मूड में थी। अब तो मैं भी पागल हो उठा। बाथ-टब से उसे अपनी गोद में उठा कर मैं बेड पर ले गया और चुम्बन करते हुए उसके ऊपर आ गया।

नेहा की दोनों टाँगों को फ़ैलाकर मैंने अपना ‘सामान’ उसकी योनि के दरार पर रगड़ने लगा।

नेहा बोल पड़ी, “डालो भी.. अब बर्दाश्त नहीं होता !”

मैं समझ गया कि लोहा गर्म है, हथौड़ा मार दो।

मैंने पहले कंडोम पहना क्योंकि-

सेक्स करने से पाप नहीं होता…

ऐसा करने से ‘सामान’ खराब नहीं होता…

हमेशा कोन्डम लगा कर करना मेरे दोस्त…

क्योंकि ‘सामान’ के पास दिमाग नहीं होता…

सो कोन्डम पहन कर मैंने लौड़े को नेहा की चूत के मुँह पर रख कर धीरे-धीरे दबाव बना कर अन्दर डालने लगा। कोई खास परेशानी नहीं हुई, मेरा अन्दर चला गया। नेहा ने मुझे कस कर पकड़ रखा था और उसके नाखून मेरी पीठ में धंस रहे थे, पर मुझे उसकी परवाह नहीं थी।
मैं बस कमर को धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा, तो नेहा भी, “आह… आह्ह… ओह्ह… ओह्ह… फ़क मी…” चिल्लाने लगी और कमर उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी।

अब वो पूरी मस्ती में थी। बाद में हमने पोजीशन बदली, अब वो ऊपर थी और मैं नीचे। नेहा गजब की घुड़सवार साबित हो रही थी। अचानक उसकी रफ़्तार तेज हो गई अब मैं भी मन्जिल के करीब पहुँच रहा था।

लगभग मेरा और उसका एक साथ में हो गया। अचानक ही उसने मुझे कस कर पकड़ लिया जैसे निचोड़ डालेगी। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

दोस्तो, यही खेल रात भर चला। नेहा और मैं सुबह 5.30 बजे तक मजे करते रहे। बाद में नेहा ने कैडबरी मुँह में लेकर चुम्बन लिया। चुम्बन क्या था दोस्तो, स्वर्ग का आनन्द था।

नेहा ने जाते-जाते कहा, “तुम मुझे अच्छे लगे और तुम एक मर्द हो, जो औरत के अहसास को समझता है। मेरी शादी भले महेन्द्र से हुई पर सही मायनों में सुहागरात तुम्हारे साथ मनाई और तुम भी मुझे नहीं भुला पाओगे !”

उसने एक दीर्घ चुम्बन लिया और चली गई।

अब मैं भी क्या सोता ! लगभग सुबह हो चुकी थी। मैं फ़्रेश होने बाथरूम में घुस गया। नहा कर मैंने अपने लिये नाश्ता मँगाया, नाश्ता करने के बाद मैं रिसेप्शन पर गया तो देखा मेरे नाम का एक गिफ़्ट पैकेट पड़ा था। खोल कर देखा तो उसमें कैडबरी चॉकलेट का बड़ा पैकेट था और एक लैटर भी था। ज्यादा कुछ नहीं बस इतना लिखा था… ‘आप ने जो कुछ भी किया मेरे लिये उसका धन्यवाद, मैं आप से बिना मिले वापस जा रही हूँ, इसका मुझे बेहद अफ़सोस है। आप बुरा मत मानना और महेन्द्र को सिर्फ़ इतना बोलना कि मैं अपने घर चली गई हूँ, वो अभी भी अपने कमरे में सो रहा है। बाय !’

बस मेरी कहानी इतनी सी है, पर दोस्तो, एक बात बोलना चाहता हूँ शादी करने के लिये आप यह मत देखो कि आप किससे प्यार करते हो? जरुरी यह है कि आप से कौन प्यार करता है। आप शादी उससे ही करो। नेहा ने सिर्फ़ एक बार फ़ोन किया वो महेन्द्र से तलाक ले रही है और उसके घर वाले उसकी दूसरी शादी की तैयारी कर रहे हैं। मैं भी ऊपर वाले से उसकी खुशी की दुआ माँगता हूँ। वो उसका आखिरी फोन था। मैंने उसे फोन करने की कभी कोशिश नहीं की, ना ही कभी उसने फोन किया।

हाँ… पर एक बात है मैं जब भी कैडबरी चॉकलेट देखता हूँ तो उसकी बहुत याद आती है।

प्रकाशित किया गया था: कोई मिल गया