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कोई मिल गया

मैं अन्तर्वासना का बहुत पुराना पाठक हूँ, मैंने बहुत कहानियाँ पढ़ी, फ़िर मुझे लगा कि मुझे भी अपनी कहानी लिखनी चाहिए और मैंने लिखना शुरु कर दिया। मेरा ना
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प्रेषक : संजू बाबा अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार ! मेरा नाम संजू है ! मैं मुंबई का रहने वाला हूँ। मेरी कहानी है बड़ी सरल पर क
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मेरा नाम रितेश है, मैं जयपुर रहता हूँ, कद 5’10” एवरेज बॉडी नॉर्मल लुक्स और 7.5″ का लिंग ! अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ। एक दिन एक फ्रेंड ने मुझसे मे
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प्रेषक : हेमन्त जैन हेलो दोस्तो, आज मैं आप सबके सामने अपनी पहली सेक्स कहानी लिख रहा हूँ, कृपया मुझे प्रोत्साहन दें ताकि मैं और भी मज़ेदार कहानियाँ आ
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प्रेषिका : शालिनी कोई आधे घण्टे तक उसके लंड को चूसने के बाद उसके लंड से मेरे मुँह में वीर्य की पिचकारी निकली जो सीधी हलक से मेरे अंदर उतर गई। मैंने
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प्रेषिका : शालिनी नए साल की पूर्व संध्या पर मैं अकेली ही थी क्योंकि रचना पिछली रात को ही अपने माता पिता के पास चली गई थी। मैंने अपने दो-तीन दोस्तों
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लेखक : लीलाधर संदीप और इनका स्‍वाद एक जैसा था। सचमुच सारे मर्द एक जैसे होते हैं। इस खयाल पर हँसी आई। मैंने मुँह में जमा हो गए अंतिम द्रव को जबरदस्‍त
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लेखक : लीलाधर उन्होंने एक हाथ से मेरे बाएँ पैर को उठाया और उसे घुटने से मोड़ दिया। अंदरूनी जाँघों को सहलाते हुए आकर बीच के होठों पर ठहर गये। दोनों उ
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लेखक : लीलाधर वे हौले-हौले मेरे पैरों को सहला रहे थे। तलवों को, टखनों को, पिंडलियों को… विशेषकर घुटनों के अंदर की संवेदनशील जगह को। धीरे-धीरे नाइटी
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लेखक : लीलाधर काफी देर हो चुकी थी- “अब चलना चाहिए।” अनय ताज्‍जुब से बोले,”क्‍या कह रही हो? अभी तो हमने शाम एंजाय करना शुरू ही किया है। आज रात ठहर
9 मिनट
लेखक : लीलाधर मिलने के प्रश्‍न पर मैं चाहती थी पहले दोनों दंपति किसी सार्वजनिक जगह में मिलकर फ्री हो लें। अनय को कोई एतराज नहीं था पर उन्‍होंने जोड़
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लेखक : लीलाधर धीरे-धीरे यह बात हमारी रतिक्रिया के प्रसंगों में रिसने लगी। मुझे चूमते हुए कहते, सोचो कि कोई दूसरा चूम रहा है। मेरे स्‍तनों, योनिप्रदे
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पाठकों से दो शब्द : यह कहानी अच्छी रुचि के और भाषाई संस्कार से संपन्न पाठकों के लिए है, उनके लिए नहीं जिन्हें गंदे शब्दों और फूहड़ वर्णन में मजा आता ह
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प्रेषिका : स्लिमसीमा (सीमा भारद्वाज) चौथे भाग से आगे : ‘अरे मेरी सोन-चिड़ी ! मेरी रामकली ! एक बार इसका मज़ा लेकर तो देखो तुम तो इस्सस… कर उठोगी और कहो
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लेखक : प्रेम गुरु प्रेषिका : स्लिमसीमा (सीमा भारद्वाज) तीसरे भाग से आगे : ‘भौजी…चलो कमरे में चलते हैं !’ ‘वो..वो…क.. कम्मो…?’ मैं तो कुछ बोल ही नहीं
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लेखक : प्रेम गुरु प्रेषिका : स्लिमसीमा (सीमा भारद्वाज) दूसरे भाग से आगे : ‘ओ म्हारी माँ… मैं… मर गई री ईईईइ…’ और उसके साथ ही उसने 5-6 धक्के जोर जोर स
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लेखक : प्रेम गुरु प्रेषिका : स्लिमसीमा (सीमा भारद्वाज) प्रथम भाग से आगे : “क्या उसने तुम्हारी कभी ग… गां… मेरा मतलब है…!” मैं कहते कहते थोड़ा रुक गई।
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लेखक : प्रेम गुरु प्रेषिका : स्लिमसीमा (सीमा भारद्वाज) चोदन चोदन सब करें, चोद सके न कोय, कबीर जब चोदन चले लण्ड खड़ा न होय …. ….. प्रेम गुरु की याद में
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प्रेषक : अमित कुमार यह कहानी बिल्कुल सच्ची है। मेरा काम कंप्यूटर ठीक करने का है। 31 दिसम्बर की शाम आठ बजे के बाद मेरे पास एक कॉल आया, एक लड़की बोली-
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कहानी का पहला भाग: अब दिल क्या करे-1 मैं बिल्कुल नंगा बाथरूम में खड़ा अपना बदन पोंछ रहा था कि अचानक दरवाजा खुला और साथ ही मेरे कानों में रेशमा की आवाज
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प्रेषक : राज कार्तिक क्या करे बेचारा दिल जब कोई हसीना अपने हुस्न के ऐसे जलवे दिखाए कि आदमी बेचारा अपना लंगोट ढीला करने को मजबूर हो जाए ! आज के समाज
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प्रेषक : धीरज मैंने कहा- एक बात कहूँ? वो बोली- कहो ! मैंने कहा- मुझे तुम्हारे साथ सब कुछ करना है ! वो बोली- यह नहीं हो सकता। मैंने कहा- अगर यह न
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प्रेषक : धीरज नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम धीरज है, उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में रहता हूँ। मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और काफी दिनों से सोच रहा था कि
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नमस्कार…मैं एक बहुत ही हंसमुख स्वभाव का पढ़ा लिखा इन्सान हूँ और एक अच्छे परिवार से हूँ। यह एक सच्ची घटना है। मैं एक ट्रेन से सफ़र कर रहा था, मुझे वि
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प्रेषक : सुरेश हाय दोस्तो, मेरा नाम सुरेश है, मैं सूरत से हूँ, मेरी उम्र 21 साल है, कद 5 फ़ुट 3 इंच है। मैंने यहाँ अन्तर्वासना पर काफ़ी कहानियाँ पढ़ी ह
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कहानी का पिछ्ला भाग: सब्जी वाले से सेक्स-1 मैं बोली- बहुत अच्छी! और चोदो चाचा! इतना बड़ा लण्ड पहली बार मिल रहा है, और चोदो अहह! वो बोला- साहब नही चोद
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मैं परवीना, कद 5’4″, बदन 38-34-40, उम्र 33 साल, पति ज़्यादातर बाहर रहते हैं, पर मेरे घर का हट्टाकट्टा नौकर मनोहर मेरे घर में ही रहता है, तो मैं अपने
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क्यों नहीं? तो मारो ! मेरा भी मन कर रहा है ! प्रेम तो गाँड को हाथ भी नहीं लगाता। चिन्ता मत करो जानू ! इतने ही पीछे से आवाज आई- भाभी? हमने देखा, री
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हाय दोस्तो, मैं राज एक बार सभी चूत वालियों को लण्ड हिलाकर प्रणाम और सभी लण्डधारियों को नमस्कार। आपने मेरी कहानियाँ “सुहागरात भी तुम्हारे साथ मनाऊँग
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हाय दोस्तो, मैं राज कौशिक अपनी कहानी सुहागरात भी तुम्हारे साथ मनाऊँगी जो चार भागों में प्रकाशित हुई थी, के आगे का भाग भेज रहा हूँ। लक्ष्मी की सगाई हो
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